दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन
चन्द्रकान्ति रमावती देवी आर्य महिला पी०जी० कॉलेज गोरखपुर एवं राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित द्वि-द्विवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है जिसका विषय बौद्ध शिक्षा दर्शन आधुनिक विश्व की जटिल चुनौतिया एवं संतुलित द्वष्टिकोण " है कार्यक्रम के दूसरे दिन तृतीय तकनीकी सत्र में कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन तथा सरस्वती वन्दना के साथ किया गया। इस सत्र का संचालन श्रीमती श्वेता सिंह के द्वारा किया गया। इसमें बतौर मुख्य वक्ता प्रो० सुषमा पाण्डेय (शिक्षा संकाय, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्व विद्यालय, गोरखपुर ) तथा अध्यक्ष प्रो० नरेश प्रसाद भोक्ता ( पूर्व आधिष्ठाता, शिक्षा संकाय, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्व विद्यालय, गोरखपुर ) उपस्थित रहे। प्रो. सुषमा पाण्डेय के द्वारा भगवान बुद्ध की शैक्षिक उपादेयता पर व्याख्यान दिया गया तथा कहा गया कि हमारी शिक्षा व्यवस्था मूल्यविहीन होती जा रही है जिसमें हमे मूल्य और संस्कार भरने होगें। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो० नरेश प्रसाद भोक्ता ने कहा कि सद्विचार आचार की पुरानी परम्परा के बौद्ध सन्देश को हमें अपनाना होगा तभी देश का कल्याण होगा। इस सत्र में आभार ज्ञापन डा० अतुल किशोर शाही के द्वारा किया गया।
चतुर्थ तकनीकी सत्र का संचालन डा० प्रीति त्रिपाठी के द्वारा किया गया। इसमें बतौर मुख्य वक्ता प्रो० रमेश प्रसाद पाठक ( शिक्षा संकाय श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली) तथा अध्यक्ष प्रो० बृजेश कुमार पाण्डेय (प्राचार्य, रामजी सहाय पी०जी० कॉलेज, रूद्रपुर, देवरिया) उपस्थित रहे। प्रो० रमेश प्रसाद पाठक के द्वारा बतौर मुख्य वक्ता कहा गया कि बौद्ध धर्म में निर्वाण प्राप्ति के लिए सदाचार तथा नैतिक जीवन पर अत्यधिक बल दिया गया है एवं दस शीलों का अनुशीलन नैतिक जीवन का आधार है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो० बृजेश कुमार पाण्डेय ने सारनाथ के महत्व को बताते हुए देश- विदेश में अपनाये जा रहें बौद्ध धर्म की चर्चा की। इस अवसर पर डॉ० अभिषेक कुमार मिश्रा, नेहा सिंह, डॉ० प्रेरणा पाठक, संजीव कुमार मिश्र, नीरा श्रीवास्तव, अरूण मणि पाण्डेय, डॉ० मुहम्मद शफी भट, सुकन्या सोनकर, आराधना श्रीवास्तव, सोनु दूबे के द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किया गया।
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो० संजीत कुमार गुप्ता ( कुलपति, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया), अध्यक्ष डॉ० विभ्राट चन्द्र कौशिक (अध्यक्ष बी०एड० विभाग, बुद्ध पी०जी० कॉलेज, कुशीनगर) उपस्थित रहे जिनके द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि बुद्ध की शिक्षाओं का सार है- शील, समाधि और प्रज्ञा। मोक्ष या निर्वाण ही उनके समस्त उपदेशो का एक मात्र रस है। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ० पूर्णेश नारायण सिंह ( अध्यक्ष बी०एड० विभाग, हीरा लाल पी०जी० कॉलेज, खलीलाबाद), प्रो० उमेश यादव (अध्यक्ष बी०एड० विभाग, जवाहर लाल नेहरू पी०जी० कॉलेज महाराजगंज), प्रो० संतोष कुमार सिंह ( प्राचार्य रतनसेन डिग्री कॉलेज, बॉसी, सिद्धार्थ नगर), प्रो० अर्चना मिश्रा (अध्यक्ष बी०एड० विभाग रतनसेन डिग्री कॉलेज, बॉसी, सिद्धार्थ नगर) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ० रेखा श्रीवास्तव (अध्यक्ष एम० एड० विभाग) के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ० अपर्णा मिश्रा (अध्यक्ष बी०एड० विभाग) के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रबन्धक डॉ० विजयलक्ष्मी मिश्रा, प्राचार्य डॉ० सुमन सिंह, उप प्राचार्य डॉ० स्वप्निल पाण्डेय, डॉ० आस्था प्रकाश, डॉ० अमिता अग्रवाल, डॉ० पवन, डॉ० शिवानी, डॉ० रेखा रानी शर्मा, डॉ० ममता, डॉ० श्वेता, डॉ० इतेन्द्र धर दूबे, डॉ० सारिका, श्री अनन्त पाठक, डॉ०अनीता सिंह, श्रीमती अंजली शुक्ला, श्री शंकर थापा, श्रेया द्विवेदी, श्री शैलेन्द्र कुमार राव, डॉ० ज्योत्सना त्रिपाठी श्रीमती सोनू दूबे, प्रवक्ता गण उपस्थित सुश्री पूजा गुप्ता, श्रीमती देवता पाण्डेय, डॉ० विकास श्रीवास्तव इज्मदी समस्त प्राचार्या
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